Author : Kumar Kant
Publisher : Uttkarsh Prakashan
Length : 128Page
Language : Hindi
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गया, बिहार निवासी लेखक कुमार कांत की कृति 'मुखर वर्जनाएँ' समकालीन संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ को मुखर स्वर में प्रस्तुत करने वाला रचनात्मक संग्रह है। इस पुस्तक में लेखक ने अपने विचारों, अनुभवों और प्रश्नों को सशक्त साहित्यिक अभिव्यक्ति दी है। मुखर वर्जनाएँ की रचनाएँ समाज में व्याप्त सीमाओं, अंतर्द्वंद्वों और मौन स्वीकृतियों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं। लेखक की भाषा सरल होते हुए भी प्रभावशाली है, जो पाठक के मन में गहरी छाप छोड़ती है। यह पुस्तक उत्कर्ष प्रकाशन से प्रकाशित लेखक की दूसरी कृति है। इससे पूर्व उनकी पहली पुस्तक 'खुली दिशाएँ खुले मुहाने' प्रकाशित हो चुकी है, जिसने पाठकों के बीच सकारात्मक पहचान बनाई थी।
BOOK DETAILS
| Publisher | Uttkarsh Prakashan |
| ISBN-10 | 9789349808492 |
| Number of Pages | 128 |
| Publication Year | 2025 |
| Language | Hindi |
| ISBN-13 | 9789349808492 |
| Binding | Hardcover |
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